पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील अख्तर की मौत के मामले में हत्या की एफआईआर दर्ज कराने वाले शमशुद्दीन चौधरी की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। मलेरकोटला निवासी अनवर महबूब ने बुधवार को सीबीआई और पंजाब विजिलेंस ब्यूरो में एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें शमशुद्दीन पर दलाली और बेनामी संपत्ति रखने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता अनवर महबूब ने आरोप लगाया है कि शमशुद्दीन चौधरी निलंबित डीआईजी हरचरण भुल्लर के ‘दलाल’ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 2011 से 2013 के बीच, जब हरचरण भुल्लर संगरूर के एसएसपी थे, शमशुद्दीन उनके लिए अनौपचारिक काम करते थे। उन्होंने एसएसपी के घर पर खाने-पीने की भी व्यवस्था की थी।
अनवर महबूब ने अपनी शिकायत में माँग की है कि सीबीआई शमशुद्दीन चौधरी के बैंक खातों की पूरी जाँच करे। उनका कहना है कि जाँच के बाद पता चलेगा कि शमशुद्दीन ने बड़े पैमाने पर बेनामी संपत्तियाँ खरीदी हैं और कई कंपनियाँ दूसरों के नाम पर चलाई जा रही हैं।
दूसरी ओर, शमशुद्दीन चौधरी ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपना बचाव किया है। उन्होंने कहा कि उनका डीआईजी हरचरण भुल्लर से कोई संबंध नहीं है और न ही उनके पास कोई फोटो या दस्तावेज़ हैं। शमशुद्दीन ने चुनौती दी है कि अगर उन्होंने कभी दलाली की है, तो उनके और डीआईजी के बीच एक भी लेन-देन साबित किया जाए।
गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा के बेटे अकील अख्तर की पंचकूला में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। अपनी मौत से पहले अकील ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि उनका परिवार उनकी हत्या की साजिश रच रहा है। इस वीडियो के आधार पर शमशुद्दीन चौधरी ने मुस्तफा परिवार के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद, शमशुद्दीन चौधरी ने मलेरकोटला पुलिस से अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा मांगी है। उन्होंने आवेदन में लिखा है कि अगर उन्हें कोई नुकसान पहुँचा तो उसकी ज़िम्मेदारी पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि 15 दिन पहले उन्होंने सुरक्षा के लिए पत्र दिया था, लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। फ़िलहाल, उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं।
यह मामला अब दोनों तरफ़ से गंभीर होता जा रहा है – एक तरफ़ जहाँ शमशुद्दीन चौधरी मुस्तफा परिवार के ख़िलाफ़ इंसाफ़ की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ उन पर लगे दलाली और बेनामी संपत्ति के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई और विजिलेंस अब दोनों पक्षों के दावों की जाँच में जुटी है।



