लुधियाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा साइबर ठगी का मामला बताया जा रहा है, जिसमें यूरोप और नॉर्थ अमेरिका तक नेटवर्क फैला हुआ था। पुलिस ने इस मामले में कुल 132 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी के दौरान करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये की भारतीय मुद्रा, 98 लैपटॉप, 229 मोबाइल फोन और 19 वाहन बरामद किए गए हैं। इसके अलावा 300 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है और अन्य खातों की जांच जारी है। आयकर विभाग को भी सूचित कर जांच में शामिल किया गया है।
यह मामला एफआईआर नंबर 37 दिनांक 13-05-2026 के तहत साइबर क्राइम थाना, लुधियाना में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर संधू टॉवर और सिल्वर ओक के पास स्थित कई अवैध कॉल सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की गई, जहां से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपी विदेशी नागरिकों को निशाना बनाते थे। वे कंप्यूटर स्क्रीन पर माइक्रोसॉफ्ट के नाम से फर्जी वायरस अलर्ट दिखाकर लोगों को कॉल करने के लिए मजबूर करते थे। इसके बाद कॉल को इंटरनेट आधारित सॉफ्टवेयर के जरिए फ्रॉड टीम तक पहुंचाया जाता था। आरोपी पीड़ितों को रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाकर उनके सिस्टम तक पहुंच बनाते थे और फर्जी स्कैन दिखाकर बैंकिंग जानकारी हासिल करते थे। बाद में खुद को बैंक अधिकारी बताकर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। ठगी की रकम को हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध तरीकों से भारत लाया जाता था। फिलहाल पुलिस डिजिटल सबूतों, मनी ट्रेल और अन्य आरोपियों की पहचान को लेकर गहन जांच में जुटी है।


