कहीं गुम हो जाने के सालों बाद अगर कोई वापस खुद ही घर आ जाए तो ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। ऐसा ही कुछ देखने को मिला है हरियाणा के अंबाला में जहां पर 9 साल की छोटी सी उम्र में गुम हुआ संजय 29 साल बाद गूगल मैप के जरिए वापस अपने घर पहुंचने में कामयाब रहा और उसे देखकर अब परिवार वालों के आंखों में खुशी के आंसू हैं जो रुकने का नाम नहीं ले रहे।
अंबाला कैंट के कबीर नगर का रहने वाला मासूम संजय साल 1996 में लापता हो गया था। उस समय उसकी उम्र सिर्फ 9 साल की थी। गुम हो जाने के 29 साल बाद संजय करीब 1 सप्ताह पहले अचानक अपने घर वापस लौटा आया है। जिससे सभी हैरान रह गए। संजय की वापसी पर हालात ऐसे हो गए कि पहले तो उसके परिवार ने उसे पहचाना तक नहीं। इसके बाद जब उसने अपने बचपन के किस्से साझा किए तो परिवारवालों को उस पर यकीन आया क्योंकि 29 सालों बाद संजय का वापस खुद से घर आ जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। अब उनके खुशी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
29 साल बाद वापस घर लौटने पर संजय ने बताया कि वो 9 साल की उम्र में अपने घर से मंदिर के लिए निकला था। वहां से खेलते हुए वो सब्जी मंडी पहुंचा और फिर वहां से अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन चला गया। वहां जाने के बाद वो एक ट्रेन में चढ़ गया। इसके बाद उसे नींद आ गई और ट्रेन चलने लगी। इस तरह कई रेलवे स्टेशन चले गए और वो नींद के चलते कुछ समझ नहीं सका। जब वो ट्रेन से यूपी के आगरा उतरा तो उसे घर का पता याद नहीं था।
अंबाला से 426 किलोमीटर दूर आगरा में एक ढाबे वाले इंद्रजीत और उसकी पत्नी गीता ने उसे अपने साथ रख लिया। उस ढाबे वाले के परिवार के साथ ही वो रहने लगा। ढाबे वाले की कोई संतान नहीं थी। बाद में उसके 3 बच्चे हुए। इसी बीच ढाबे वाला परिवार साल 2002 में मेरठ शिफ्ट हो गया और वहां से 2004 में ऋषिकेश शिफ्ट हो गया। इसी बीच वो अपने परिवार को ढूंढने के लिए सोचता रहा। फिर एक दिन ऋषिकेश में संजय की मुलाकात राधिका से हुई। दोनों एक फैक्ट्री में काम करते थे जिसमें बल्ब और तार बनाए जाते थे। साल 2009 में संजय ने राधिका से शादी कर ली जिसके बाद उसके 3 बच्चे हुए।
एक दिन उसे याद आया कि उसके घर के पास एक पुलिस चौकी थी और उसके सामने दरगाह थी। उसने गूगल पर इसे लेकर सर्चिंग शुरू की। उसने सर्च किया कि ऐसी कौन सी जगह है जहां थाने के सामने दरगाह है, तब उसे महेशनगर थाने के पास गूगल पर अंबाला की लोकेशन मिल गई। इसके बाद वो गूगल मैप के जरिए अंबाला में उस जगह पहुंचा जहां थाने के सामने दरगाह थी। यहां वो अपने परिवार को ढूंढते-ढूंढते अपने घर वाली गली में पहुंच गया।
संजय लोगों से पूछताछ कर ही रहा था तो उसे वीणा ने आवाज लगाई और पूछा कि किसे ढूंढ रहे हो। वीणा को संजय ने अपने बारे में बताया कि उसके पिता का नाम कर्मपाल और माता का नाम वीणा है और वो छोटी उम्र में गुम हो गया था। वीणा को उसकी बातों पर भरोसा नहीं हुआ लेकिन उसने संजय का मोबाइल नंबर ले लिया और फिर वहां से चला गया।
पिछले हफ्ते वीणा ने संजय से संपर्क किया और उसे अंबाला आने के लिए कहा। यहां आने के बाद उसकी बहनों ने और मां वीणा ने उससे बचपन की कुछ बातें पूछी तो उसने सब सही-सही बता दिया जिसे सुनकर उसके परिवार को पहले तो यकीन नहीं हुआ लेकिन उसकी सारी बातें सही पाए जाने पर फिर उन्हें भरोसा हुआ कि यही सालों पहले गुम हुआ संजय है।
संजय की मां वीणा ने बताया कि जब संजय लापता हुआ था, तब उसकी गुमशुदगी की शिकायत उस दौरान महेशनगर चौकी में दी थी, लेकिन संजय नहीं मिला था। अब संजय वापस लौट आया है। इतने साल बाद एकदम अचानक संजय को पाकर कुछ समझ नहीं आ रहा कि ये हकीकत है या सपना।
वहीं संजय की बहन रजनी ने कहा कि संजय के लापता होने के बाद से वो संजय की फोटो को ही राखी बांधा करती थी। उसे यकीन था कि एक दिन उसका बिछड़ा भाई जरूर वापस घर लौटेगा और आज वो दिन आ गया है। संजय को वापस देखकर बहुत खुशी हो रही है। संजय से बचपन के कई किस्से साझा किए हैं।
वहीं संजय की पत्नी राधिका ने बताया कि संजय को आखिरकार इनके संघर्ष के बाद उसका परिवार मिल गया है जिसकी उसे बहुत खुशी हो रही है। राधिका ने बताया कि संजय से उसकी मुलाकात ऋषिकेश में एक फैक्ट्री में हुई थी। उसके बाद दोनों की शादी हुई। अब उनके पास 3 बच्चे हैं।
हिंदी में मुहावरा है कि ढूंढने पर तो भगवान भी मिल जाते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ है संजय के साथ जिसने इतने साल अपने परिवार से जुदा होने के बाद भी उन्हें ढूंढने की कोशिशें लगातार जारी रखी और गूगल का इस्तेमाल करते हुए आज वो दिन आ ही गया जब संजय अपने परिवार के साथ है और बेहद खुश है.





